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भ्रष्टाचार से भरा गुबार धूल में बदल गया

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    “भ्रष्टाचार से भरा गुबार धूल में बदल गया” मित्रों ! सुनने में यह वाक्य कितना अच्छा लगता है ,निश्चय ही यह ईमानदारी और निष्ठा के प्रति हमारी आस्था को मजबूत भी करता है| किन्तु इस समूचे परिदृश्य के पीछे की स्थितियों को यदि गौर से देखें तो क्या कुछ सवाल मन में नहीं उठते ? १. 12 साल लगे जिस 32 मंजिला ईमारत को बनने में वह बारह मिनट में धराशाही हो गई | अर्थात सृजन और विनाश के अन्तराल को हम समझ पा रहे हैं | फिर क्यों मनुष्य अपनी उर्जा को इन विनाशकारी कार्यों में व्यय कर रहा है ?हम स्वयं को शिक्षित होने का दावा करते हैं , क्या यही है हमारी शिक्षा ...? २. 12 वर्षों का समय कम नहीं होता, प्रश्न उठता है, कोई विषैला वृक्ष कैसे 12 वर्षों तक पल्लवित होता रहा और प्रशासन की दृष्टि नहीं गई उस पर ? गई किन्तु मामला क़ानूनी प्रक्रिया में उलझा रहा | ३. 11 वर्ष से कानून की फाइलों में चहलकदमी करता,इठलाता यह मुद्दा ...क्या हमारी क़ानूनी प्रक्रिया जिम्मेदार नहीं ? अगर समय पर निर्णय हो जाता तो आज जो धन, हाथों के श्रम, प्रकृति के खनन के विनाश से राष्ट्रीय क्षति हुई वह न होती | क्या इस राष्ट्रीय क्षति के ...